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होली पर्व की शुभकामनाएं देते बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री,तह.-सराईपाली, जिला-महासमुन्द(छ ग)से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"की रचना-होली

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*होली* हर इंसान अपने रंग में रंगा हो तो,समझ लेना होली है। हर रंग कुछ कहता ही है,हर रिश्ते में हँसी ठिठोली है।    जीवन रंग महकाती, आनंद उमंग उल्लास से।    जीवन महक उठता है,एक दूसरे के विश्वास से।    प्रकृति की हरियाली,मधुमास की राग है।   नवकोपलों से लगता,कोई लिया वैराग्य है। हर गले शिकवे को मिटा दो,फैलाओ ये प्रेम रूप झोली है। हर इंसान..................1    आग से राग तक,राग से वैराग्य तक।    चलता रहे यूँ ही,परंपरा ये फाग तक। होलिका दहन की आस्था,युगों युगों से चली आ रही। आग में चलना,राग में गाना,प्रेम की गंगा जो बही। परंपरा ये अनूठी,होती कितनी हर किसी से हँसी ठिठोली है। हर इंसान.........................2 सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" साहित्य साधना सभा,छत्तीसगढ़ ग्रा.-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री, तह.-सराईपाली,जिला-महासमुन्द(छ.ग.) मो.- 8103535652        9644135652 ईमेल- sldmadhur13@gmail.com

पुलवामा के शहीदों को याद करती बाराडोली,सराईपाली जिला- महासमुन्द(छ.ग.) से सुन्दर लाल डडसेना "मधुर " की रचना- पुलवामा के शहीद

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*पुलवामा के शहीद* कितने बारूदी सुरंग बिछे हैं कश्मीर की घाटी में। अनगिनत जवान शहीद हुए हैं कश्मीर की माटी में। धरती का स्वर्ग कहलाता,जो फूलों की सुन्दर बाग है। व्यर्थ न जाए 40 जवानों की शहादत पुलवामा की माटी में। अँजुरी में चिथड़े मांस को लेकर जब जवान आया होगा। शोकाकुल परिवार ही नहीं पूरा गाँव मातम मनाया होगा। धरती काँपी होगी आसमान भी थरथर र्थराया होगा। सोचो क्या हुआ होगा जब एक एक ने सौ सौ गोली खाया होगा। बेटे का शीश धड़ से अलग देख,वो माँ कितनी रोई होगी। बिन राखी वाली कलाई देख,वो बहन कैसे सोई होगी। पिता अपने फर्ज के खातिर आँसुओं का घूँट पीया होगा। सिंदूर भरने वाले ऊँगलियों के बिन,पत्नी बेसुध होई होगी। *सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"* ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) पिन- 493558 मोब.- 8103535652 , 9644035652 ईमेल- sldmadhur13@gmail.com

छत्तीसगढ़ के अन्न दान के पर्व पर बाराडोली,सराईपाली, जिला- महासमुन्द(छत्तीसगढ़) से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- अन्न दान के परब- छेरछेरा

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*अन्न दान के परब-छेरछेरा* धान पान ला मिंज के,घर मा लाए अन्न किसान। जश्न मनावत किसान मन,करे खुलके अन्न दान। छेरछेरा तिहार हर हवे,छग संस्कृति के पहिचान। बनिहार किसान संगेसंग,मिले सब्बो ला सम्मान।1। संगी संगवारी जुर मिलके,घर घर गावे मंगल गान। अरन बरन कोदो दरन,जभे देबे तभे टरन,गूँजे गान। छेरछेरा छेरछेरा,माई कोठी के धान ल हेरहेरा गीत। सब्बो मुट्ठी मुट्ठी भरके,करें आज खुल के अन्न दान।2। सबके घर मा रोटी पीठा,घर के दाई चुरोवत हे। घर के मुड़ा बैठ डोकरी,सबला छेरछेरा देवत हे। कोन गरीब कोन अमीर,कोन लईका कोन सियान। आज सब्बोझन बड़े बिहनिया,छेरछेरा ला कुटत हे।3। कोनो के घर कोनो जावय,कोनो बाजा झांझ बजावय। जात धरम ल भूल भुलाके,गाँव खोल मा चिल्लावय। आज बने हवें सबे मंगवईया,अउ सब्बो दान देवइया। मिल जुर के सब्बो पूस पुन्नी छेरछेरा तिहार मनावय।4। *सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"* ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) पिन- 493558 मोब.- 8103535652 , 9644035652 ईमेल- sldmadhur13@gmail.com

मकर संक्रांति के उपलक्ष्य पर बाराडोली,सराईपाली जिला- महासमुंद(छत्तीसगढ़) से रचनाकार सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- चलो मकर संक्रांति मनाएँ

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*चलो मकर संक्रांति मनाएँ* धुंध कुहरे की चादर अब छटने लगी है। मधुर मन का तमस अब हटने लगी है। गए काँटों सी सर्दी,गुलाबी गर्म दिन आए। धनु राशि से चल,सूर्य मकर राशि में आए। घोर अंधेरे को चीर,नव चेतना मन में जगाए।  मकर संक्रांति सबके जीवन में खुशियाँ लाए। सूर्य सी आभा जीवन में चमकने लगी है। धुंध कुहरे की...................................1. देखो आसमान में रंग-बिरंगें पतंगें लहराई है। कहीं लोहड़ी,कहीं पोंगल,कहीं पीहू कहलाई है। भोगली बिहू,कहीं खिचड़ी संग चावल की लाई है। कहीं गुड़ तिल की लड्डू रिश्तों में मिठास छाई है। दिन की अवधि अब,धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। धुंध कुहरे की ....................................2. ख्वाब तुम्हारे ऊँचा,पतंग सा पूरा खास हो। जीवन में गुड़-तिल लड्डू सा पूरा मिठास हो। सूर्य की आराधना से,हर जीवन में उल्लास हो। दया,प्रेम फैले व जीवन में मधुर अहसास हो। मौसम सुहाना खुशियाँ बेतहाशा होने लगी है। धुंध कुहरे की..................................3. *सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"* ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) पिन- 493558 मोब.- 8103535652...

बाराडोली,सराईपाली, जिला- महासमुंद(छत्तीसगढ़)से रचनाकार सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की अतुकांत कविता- अपना कौन पराया कौन

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*अपना कौन पराया कौन* जीवन में अपनों का साथ महत्वपूर्ण है। लेकिन अपना किसे कहेंगे मधुर? जो दुःख में साथ दे वो अपना, जो दुःख में साथ न दे वो पराया। नहीं, अपनों की पहचान विपत्ति के समय होती है, जो अपने को रक्तसंबंधी कहते हैं, उससे तो बेहतर वो रक्तदाता है, जो आपको रक्त देकर जान बचाता है। अपने होने का फर्ज निभाता है। लेकिन हम उसे कैसे भूल जाते हैं। हम भी कहाँ अपना फर्ज निभाते हैं। वास्तव में हम जिन्हें अपना समझते हैं, क्या वे भी हमें अपना या पराया कहते हैं। अपने तो समय स्थिति के साथ बदलते रहते हैं। कल तक जो प्रशंसा करते थे,आज बुराई करते हैं। क्योंकि अपनों के साथ समय का पता ही नहीं चलता है। समय के साथ अपनों का पता अवश्य ही चलता है। *सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"* ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) पिन- 493558 मोब.- 8103535652 , 9644035652 ईमेल- sldmadhur13@gmail.com

नया वर्ष 2022 की शुभकामना देते व नया वर्ष सबके जीवन में नव मंगल लाये इसी आशा विश्वास के साथ बाराडोली(बालसमुंद),सराईपाली,जिला महासमुंद(छत्तीसगढ़) से युवा कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की बेहतरीन कविता- "हो मंगलमय यह वर्ष"

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*हो मंगलमय यह वर्ष* नव विचार नव उत्साह संग,आया है नववर्ष। सदा जीवन में हो खुशियाँ, बना रहे उत्कर्ष। चलो हम पढ़ें,प्रेम दया त्याग की दिव्य भाषा। चलो हम गढ़ें,नए भारत की संकल्प  आशा। चलो हम छोड़ें,मन से नफरत,द्वेष व निराशा। चलो उड़ान उड़ें,मिले सपनों को नई आशा। जीवन खुशियों से भरे,हो मंगलमय यह वर्ष। नव विचार नव.................................1. गर स्वप्न मन में हो मधुर,उसे सजा लो जरा। नवरंग बिखरे जीवन में,उसका मजा लो जरा। मधुर कंठ लिए नवोत्कर्ष का गीत गा लो जरा। रूठा हो मीत कोई मधुर,उसको मना लो जरा। आयी है सुहानी पल,मन में छाया है आज हर्ष। नव विचार नव...................................2. दुःख दर्द का अंत हो,अपना जग बने खुशहाल। नवप्रभात किरण लिए,करे देश अपना कमाल। कदम कदम में खुशियाँ मिले,जीवन हो खुशहाल। मिटे मन का अंधकार मधुर,शुभ हो नया साल। भेज रहा हूँ शुभकामनाएं, करें स्वीकार सहर्ष। नव विचार नव..................................3. *सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"* ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) पिन- 493558 मोब.- 8103535652 , 9644035652 ईमेल- sld...

छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर नारायण सिंह के बलिदान दिवस पर सराईपाली,जिला-महासमुंद(छत्तीसगढ़) से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की कविता- छत्तीसगढ़ का माटीपुत्र- वीर नारायण सिंह

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*छत्तीसगढ़ का माटीपुत्र- वीर नारायण सिंह* छत्तीसगढ़ की धरा में इंकलाब का बिगुल बजाया था। भूखे-मजदूर-किसानों के लिए स्वयं ही बीड़ा उठाया था। जन आंदोलन का आगाज माखन सेठ के गोदाम लूट से। सोए आदिवासियों को वीर नारायण सिंह ने जगाया था।1। कुछ लंका भेदियों के कारण वीर को जेल हुआ। किंचित क्षण ही स्वतंत्रता की ज्वाला फेल हुआ। जेल में तपकर सोना अब ज्यादा चमकने लगा। सज चुके समर में अंग्रेजों संग खूनी खेल हुआ।2। वीर नारायण ने साथियों संग अभेद्य किला बनाई थी। लोहा लेते वीर से अंग्रेज सशस्त्र सेना भी घबराई थी। कुछ भेदी चाटुकारों के कारण वीर नारायण पकड़े गए। 10 दिसम्बर 1857 को जयस्तंभ में फाँसी लगाई थी।3। कर्ज है तुम्हारा न भूलेगा याद करेगी धरती सोनाखान। इस धरा पर जन्म लिए वीर नारायण माटीपुत्र महान। छत्तीसगढ़ के प्रथम वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को। पूरे भारत में नित मिलता रहेगा ऐसा ही सम्मान।4। *सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"* ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) पिन- 493558 मोब.- 8103535652 , 9644035652 ईमेल- sldmadhur13@gmail.com