छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर नारायण सिंह के बलिदान दिवस पर सराईपाली,जिला-महासमुंद(छत्तीसगढ़) से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की कविता- छत्तीसगढ़ का माटीपुत्र- वीर नारायण सिंह
*छत्तीसगढ़ का माटीपुत्र- वीर नारायण सिंह*
छत्तीसगढ़ की धरा में इंकलाब का बिगुल बजाया था।
भूखे-मजदूर-किसानों के लिए स्वयं ही बीड़ा उठाया था।
जन आंदोलन का आगाज माखन सेठ के गोदाम लूट से।
सोए आदिवासियों को वीर नारायण सिंह ने जगाया था।1।
कुछ लंका भेदियों के कारण वीर को जेल हुआ।
किंचित क्षण ही स्वतंत्रता की ज्वाला फेल हुआ।
जेल में तपकर सोना अब ज्यादा चमकने लगा।
सज चुके समर में अंग्रेजों संग खूनी खेल हुआ।2।
वीर नारायण ने साथियों संग अभेद्य किला बनाई थी।
लोहा लेते वीर से अंग्रेज सशस्त्र सेना भी घबराई थी।
कुछ भेदी चाटुकारों के कारण वीर नारायण पकड़े गए।
10 दिसम्बर 1857 को जयस्तंभ में फाँसी लगाई थी।3।
कर्ज है तुम्हारा न भूलेगा याद करेगी धरती सोनाखान।
इस धरा पर जन्म लिए वीर नारायण माटीपुत्र महान।
छत्तीसगढ़ के प्रथम वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को।
पूरे भारत में नित मिलता रहेगा ऐसा ही सम्मान।4।
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.)
पिन- 493558
मोब.- 8103535652 , 9644035652
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