बाराडोली,सराईपाली, जिला- महासमुंद(छत्तीसगढ़)से रचनाकार सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की अतुकांत कविता- अपना कौन पराया कौन
*अपना कौन पराया कौन*
जीवन में अपनों का साथ महत्वपूर्ण है।
लेकिन अपना किसे कहेंगे मधुर?
जो दुःख में साथ दे वो अपना,
जो दुःख में साथ न दे वो पराया।
नहीं,
अपनों की पहचान विपत्ति के समय होती है,
जो अपने को रक्तसंबंधी कहते हैं,
उससे तो बेहतर वो रक्तदाता है,
जो आपको रक्त देकर जान बचाता है।
अपने होने का फर्ज निभाता है।
लेकिन हम उसे कैसे भूल जाते हैं।
हम भी कहाँ अपना फर्ज निभाते हैं।
वास्तव में हम जिन्हें अपना समझते हैं,
क्या वे भी हमें अपना या पराया कहते हैं।
अपने तो समय स्थिति के साथ बदलते रहते हैं।
कल तक जो प्रशंसा करते थे,आज बुराई करते हैं।
क्योंकि अपनों के साथ समय का पता ही नहीं चलता है।
समय के साथ अपनों का पता अवश्य ही चलता है।
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.)
पिन- 493558
मोब.- 8103535652 , 9644035652
Comments
Post a Comment