होली पर्व की शुभकामनाएं देते बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री,तह.-सराईपाली, जिला-महासमुन्द(छ ग)से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"की रचना-होली
*होली*
हर इंसान अपने रंग में रंगा हो तो,समझ लेना होली है।
हर रंग कुछ कहता ही है,हर रिश्ते में हँसी ठिठोली है।
जीवन रंग महकाती, आनंद उमंग उल्लास से।
जीवन महक उठता है,एक दूसरे के विश्वास से।
प्रकृति की हरियाली,मधुमास की राग है।
नवकोपलों से लगता,कोई लिया वैराग्य है।
हर गले शिकवे को मिटा दो,फैलाओ ये प्रेम रूप झोली है।
हर इंसान..................1
आग से राग तक,राग से वैराग्य तक।
चलता रहे यूँ ही,परंपरा ये फाग तक।
होलिका दहन की आस्था,युगों युगों से चली आ रही।
आग में चलना,राग में गाना,प्रेम की गंगा जो बही।
परंपरा ये अनूठी,होती कितनी हर किसी से हँसी ठिठोली है।
हर इंसान.........................2
सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
साहित्य साधना सभा,छत्तीसगढ़
ग्रा.-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री,
तह.-सराईपाली,जिला-महासमुन्द(छ.ग.)
मो.- 8103535652
9644135652
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com
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