14 नवम्बर बाल दिवस पर सराईपाली,जिला - महासमुंद(छ.ग.) से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- बच्चे देश के भविष्य
*बच्चे देश के भविष्य*
बच्चे देश के भविष्य,उन्हें स्वावलंबी मजबूत रखो।
गर महल बनाना है ऊँचा,तो नींव ठोस अटूट रखो।
बच्चों के सपनों को पलने दो,फूल चमन में खिले।
ऋतु बसंती आएगी,बच्चों में हौसले मजबूत रखो।1।
प्यारे बच्चों तुम खूब पढ़ो,खेलो कूदो इक नाम करो।
भारत देश को श्रेष्ठ बनाने,निर्मित होकर निर्माण करो।
निष्ठावान बनो तुम भी,मन में हो देशप्रेम की भावना।
देश को महान बनाने,सच्चे मन से तुम काम करो।2।
बढ़े ज्ञान,मिटे अज्ञान,हो बच्चों में नीत मृदु मुस्कान।
बचपन खुशियों में बीते,ना कभी छीने उनका सम्मान।
बच्चों को मिले उचित संस्कार,बढ़े देश का गौरव मान।
बच्चे भारत के भविष्य,लाएंगे उज्ज्वल स्वर्ण विहान।3।
बच्चे तो हैं हमारा आज व कल,उनका हमपे उपकार।
अपना पराया का भेद मिटाकर,सब पर लुटाते प्यार।
बच्चों के नेक दिल कोमल,इसे कठोर न बनाओ मधुर।
हैं कच्ची मिट्टी की मूरत,मिले उन्हें उचित संस्कार।4।
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.)
मोब.- 8103535652 , 9644035652
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com
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