अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर बालिका शिक्षा पर जोर देते सराईपाली, जिला- महासमुन्द(छत्तीसगढ़) से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- बालिका शिक्षा की लौ
*बालिका शिक्षा की लौ*
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ सब कहते हैं,
पर कोई उचित कदम क्यों उठाता नहीं।
अज्ञान के अंधकार में आज भी है बेटी,
बालिका शिक्षा की लौ क्यों जलाता नहीं।
कभी कभी ही खिलती,कली फूल सी बहार बेटी।
घर की आन बान शान,दो कुलों की संस्कार बेटी।
पढ़ना लिखना आगे बढ़ना,है तेरा अधिकार बेटी।
माने बेटी को घर आंगन की दीपमाला,पर ज्ञान देकर उसे कोई क्यों जलाता नहीं।
बेटी बचाओ.........................1.
गर्भ में मार देते हैं,पाँव जमीं पर भी न पड़ने देते।
अज्ञानता के जंजीर से बांध,उसे न आगे बढ़ने देते।
बेटे को पढ़ाते हो,पर बेटी को क्यों न आगे पढ़ने देते।
बेटा बेटी के भेद को मिटाकर मधुर,समभाव का दीप कोई क्यों जलाता नहीं।
बेटी बचाओ.........................2.
घर में माँ बहन पत्नी चाहिए,ये भी तो एक नारी है।
तो फिर क्यों कहते हो मधुर,बेटी बोझ एक बीमारी है।
ज्ञान का प्रकाश दो बेटी को भी,शिक्षा दुनिया सारी है।
आज भी बेटी को चूल्हा चौका में बांध,बेटों सा अधिकार कोई क्यों दिलाता नहीं।
बेटी बचाओ...............................3.
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.)
मोब.- 8103535652
9644035652
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