शिक्षक दिवस पर सराईपाली, जिला- महासमुन्द(छत्तीसगढ़) से कवि सुन्दर लाल डडसेना "मधुर"की रचना- गुरु ज्ञान के सागर
*गुरू ज्ञान के सागर*
जिंदगी की अंधेरी राहों में।
गुरू ने ज्ञान का दीप जलाया है।
जब भी हम हार कर निराश हुए हैं।
गुरू ने हर मुश्किल में हमें जीना सीखाया है।
1.शिक्षक सही गलत का कराते पहचान हैं।
गुरू गुरूत्व और हम सबका सम्मान हैं।
शिक्षक मिटाते तम रूपी अज्ञान हैं।
शिक्षक माता पिता ईश्वर से भी महान है।
शिक्षक ने हमें शिष्टाचार का पाठ पढ़ाया है।
जिंदगी की अंधेरी................
2.शिक्षक ज्ञान का अलौकिक प्रकाश पुंज है।
शिक्षक संस्कारवान प्रेरणा कुंज है।
शिक्षक शिक्षा का कराते अमृतपान हैं।
शिक्षक धर्मरक्षक सरस्वती संतान हैं।
शिक्षक ने संगत के रंगत से बदलना सीखाया है।
जिंदगी की अंधेरी............
*सुन्दर लाल डडसेना "मधुर"*
ग्राम-बाराडोली (बालसमुंद)
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