बारिश की बेरुखी,आधा सावन बीत जाने के बाद भी मेघों की गरज और सावन के फुहार न पड़ने पर सराईपाली,जिला- महासमुंद(छत्तीसगढ़) से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की छत्तीसगढ़ी रचना- *कैसे मनावंव हरेली*
*कैसे मनावंव हरेली*
आगे आगे जी हरेली तिहार।
कैसे मनावंव इ साल तिहार।
सूखा पड़े हवे सब्बो खेत खार।
पड़त नइये सावन के पुहार।
होइस नइ हावे बियासी रोपाई।
सूखा हवे डबरी नरुआ खेतखार।
क्वांर कार्तिक कस घाम पिराये।
खेती मा नइ हावे कोनो बहार।
कइसने गीत गावंव जी संगी।
कइसन खुशहाली मनावंव जी।
बरसत नइ हवे करिया बादर।
आषाढ़ आधा सावन सिरागे जी।
खेत खार सब्बो दरके लागे।
नरुआ,डबरी,कुवां सुखागे जी।
गिरत नइ हवे सावन के फुहार।
रुख राहि सब्बो अधियागे जी।
करत नइ हावे कोनो बियासी।
नांगर बैला सब्बो नंदागे जी।
गुड़ चीला के मीठ नइ पावें।
छ.गढ़ी संस्कृति अब लुकागे जी।
चढेंव गेड़ी,फुगड़ी खेलत लइका।
भौंरा,बाटी,गेड़ी सब्बो नंदागे जी।
दया मया खुशी बाँटत मनखे।
धरती ले का सब्बो सिरागे जी।
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.)
मोब.- 8103535652
9644035652
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