सराईपाली, जिला-महासमुंद(छत्तीसगढ़) से सुंदर लाल डडसेना"मधुर" के आलेख- प्रथम सत्याग्रही- सुभद्रा कुमारी चौहान

सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
सराईपाली,जिला- महासमुंद(छ.ग.)
विषय- सुभद्रा कुमारी चौहान
विधा- आलेख

शीर्षक-प्रथम सत्याग्रही- सुभद्रा कुमारी चौहान
 
"ख़ूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी" व "यह कदम का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे" जैसी पंक्तियाँ सुनते ही जोश,जज्बा,जुनून छा जाती है,लेकिन क्या आप लोगों को पता है इन पंक्तियों को लिखने वाली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व राष्ट्रीय चेतना की एक सजग सुप्रसिद्ध कवयित्री व लेखिका कोई और नहीं बल्कि सुभद्राकुमारी चौहान हैं।सुभद्राकुमारी चौहान जी राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध साहित्यकार,प्रथम भारतीय  महिला सत्याग्रही,स्त्री स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति, ममतामयी माँ और अद्भुत जीवट की धनी थीं। उनके मधुर कंठ से यह कविता सुनकर लोगों में राष्ट्र-प्रेम की भावना,नई चेतना व प्रेरणा का संचार होता था।
                  सुभद्राकुमारी चौहान जी का जन्म नांग पंचमी के दिन 16 अगस्त 1904 को निहालपुर (प्रयागराज) उत्तरप्रदेश में एक राजपूत परिवार में हुआ था।उनके पिता का नाम रामनाथ सिंह था।15 वर्ष की आयु में इनका विवाह खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह के साथ हुआ।सुभद्राकुमारी जी को बचपन से ही कविता लिखने का शौक था और उन्होंने अपनी पहली कविता 9 वर्ष की आयु में नीम के पेड़ पर लिखी थी।उनकी दो कविता संग्रह-'मुकुल' व 'त्रिधारा' के साथ तीन कहानी संग्रह-बिखरे मोती(1932),उन्मादिनी(1934) व सीधे साधे चित्र(1947) )हैं।उनके कहानी संग्रह बिखरे मोती में 15 कहानियाँ,उन्मादिनी में 9 कहानियाँ व सीधे साधे चित्र में 14 कहानियाँ संकलित हैं।उनके कहानियों में स्त्री के मर्म को पिरोने के साथ ही साथ देशभक्ति की भावना का संचार करने में सक्षम थीं।"झाँसी की रानी" कविता स्वतंत्रता आंदोलन के समय लोगों के मन में जोश,जज्बा,जुनून को प्रस्फुटित कर आगे आने को प्रेरित करता था।।पति ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान ने सुभद्राकुमारी जी के बारे में कहा था,वे पराकोटिवादी हैं उनका प्रेम,आनंद,उल्लास, नैराश्य,वीरत्व,देशभक्ति सब अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचे हुए मिलते हैं।महात्मा गांधी के  1920 में शुरू असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाली प्रथम महिला बनीं,उस समय उनकी उम्र लगभग 17 वर्ष थी।आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें दो बार जेल की यातना झेलनी पड़ी।
                 15 फरवरी 1948 वसंतपंचमी के दिन एक कार-दुर्घटना में 44 वर्ष की आयु में सिवनी मध्यप्रदेश में उनकी जीवनलीला समाप्त हो गई।

*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.)
मोब.- 8103535652
          9644035652
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com

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